उदेश गौत्र पुरोहित

 शक्ति माँ जगदम्बा दुर्गा काली स्वरूप, माँ पार्वती के अंग आकर असुरबंधु का जैसे शुम्भ निशुम्भ, चण्ड मुण्ड बंधुओ का नाश करने वाली बंधुकानाशनी माता (चामुण्डा माता ) कहलाई, ये देवी दुर्गमासूर का वध किया तो दुर्गा माता कहलाई, महिसासुर का वध किया तो महिसासूर्मार्दिनी कहलाई ये ही देवी नागनेशी भी कहलाई
अतः ऋषि उद्दालक ( अटक वर्तमान में उदेश ) इनका गौत्र भरद्वाज है कुलदेवी चामुण्डा माताजी है!
ऋषि - उद्दालक
शाखा - मांन्ध्यानंदिनी
पर्वर - बृहस्पति, अंगिरा और भारद्वाज
अंगिरा के पर्वर में गोतम हुए और गोतम में ही आरुणी, उद्दालक और स्वेतकेतु हुए इसलिए बहोत से कथाओं में आरुणी गौतमा या उद्दालक गौतमा इनके पुत्र श्वेतकेतु नासीकेता पुत्री सुजाता इनका पुत्र अष्टांवक्र ऋषि इनके पिता कहोड़ ऋषि नाम से जाने गए  लेकिन गौत्र भरद्वाज हुआ...
भारद्वाज गौत्र का उल्लेख अपने यजमान राव यानि भाट बाबूलालजी मालगांव वाले उदेश गौत्र के चौपडे में उल्लेखकित है!
उद्दालक कुरु पांचाल से उतरी पांचाल से थे जहा गुरु द्रोणाचार्य, राजा प्रहवान जवली, काशी के राजा दिवोदास के राजगुरु भारद्वाज थे
  लक्ष्मण पुरोहित
गौत्र उदेश (गोमठ )
गांव पामेरा, तह. रेवदर जिला सिरोही राजस्थान
मोबाइल नं 9619452424
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